टूटते बंधन
हमें दिखा कर वो आईना,
कह रहे की चले जाओ
नहीं जरूरत हमें अब और किसी की
तुम रहो अपने दायरे की हद में
यही बताकर उन्होंने हमें
पल्ला भारी कर लिया अपना
सारी शिकायतें हमारे नाम
सारी सिद्दतें अपने नाम कर ली
कुछ रहा नही बाकी अब
रुकने के लिए
चले जाएं जिंदगी से उनकी
कर ऐसा वो यही चाहते है
कि हम लौट कर ना आए कभी
वापस आने का रास्ता किया बंध
दरवाज़े, खिड़की की किवाड़ों को
कर लिया कुछ ऐसे बंध
झांक सके ना मेरी नज़र
उनकी खुशी में ही अपनी खुशी
यदि यही मर्जी तो यही सही
हमारे सर ओढ़ा कर
लज्जा का घूंघट कह दिया
तुम्हारा कोई नही है यहां
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