भारत एक महान देश के साथ साथ अद्वितीय इतिहास की संपदा से युक्त अलौकिक राष्ट्र है। सोने की चिड़िया है..!! ईश्वर का प्रिय देश है..!! अनुपम, महत्तम, श्रेष्ठतम, उच्चतम है..!! भारत की साहित्यिक संपदा ही भारत की सही परिचायक है..!! भारत को विश्व के सामने चिरस्थापित करने में जिसका अविभाज्य भूमिका है..!! लेकिन ऐसा होते हुवे भी, बावजूद इस गरिमा के, यह भी एक कटु सत्य है कि, भारत की अत्यंत गरिमायुक्त सत्य ज्ञान को मिथक ने नष्ट कर दिया है..!! जी हाँ, मिथक ही वह है जो हमे सत्य से बहोत दूर तक ले गया है। हमने कभी भी मिथक की जड़े ढूंढने व जानने की कोशिश नही की, बस आंख बंद कर उसे सत्य के रूप में स्वीकार किया, बिना किसी शिकायत व आशंका को उठाये...!! क्यों..?? क्योँकि उन बातों का सम्बंध केवल लोगो की धार्मिक व भावनिक जज्बातों से होने के कारण कोई भी व्यक्ति सत्य को प्रत्यक्ष रखने व जानने की कोशिश से दूर होते ही रहे.. कभी भी नजदीक नही आये...!! मिथक की सुरुवात उन दो महान व श्रेष्ठ महाकाव्यों से ही हो जाती है,जिनके ऊपर ही समूची साहित्यिक संस्कृति, सामाजिक, धार्मिक,...
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