स्नेह वही है
सुप्त से मन को, अडिग प्रीत से,
अविरत भर दे, वही पल सही है।
जलते भाव को, आस्था से छू ले,
फिर बहला दे, साथ वही है।
पथरीली डगर पे, हाथ थाम ले
भवर से पार ले, आप्त वही है।
आंख न बही, कुछ बात न कही,
पर जो जान ले, सख्य वही है।
जान भी न गयी, पर निकल रही
मिलन को तड़पे, स्नेह वही है।
❤️❤️❤️
- वृषाली सानप काले
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