सिया की मौन पीड़ा
सुनो..
राम के दूत आये हैं तुम्हे समझाने..
अब तो समझ जाओ..
कर दो माफ..मान जाओ..
मैं मान तो जाऊँ..
मगर ..
लव-कुश को कैसे समझाऊँ..
उनका छूटा बचपन कहाँ से लाऊँ..
सिखाया गया उन सभी स्त्रियों को
सीता जैसा बनना...
उनकी पीड़ा देखकर
कैसे चुप रह जाऊँ?..
क्यों चलू मैं उस राम के साथ
एक पल भी..
जो लेता रहा मेरे चरित्र की परीक्षा..
हर मोड़ पर .. सब कुछ जानकर ..
माना मैंने सिर्फ उनसे प्रेम किया..
पूरा जीवन उनके लिए समर्पित किया..
लेकिन .. अपनी पीड़ा उन्हें क्यों सुनाऊँ..
बेकसूर होते हुए..
दोषी की तरह क्यों झुक जाऊँ?..
वो तो राजा राम हैं..
सिया के राम नहीं..
जी लेगी सिया राम के बिना..
उसका चरित्र..
उसका व्यक्तित्व..
सिर्फ उसका हैं..
किसी और के नाम नहीं..
©®स्नेहा..
राम के दूत आये हैं तुम्हे समझाने..
अब तो समझ जाओ..
कर दो माफ..मान जाओ..
मैं मान तो जाऊँ..
मगर ..
लव-कुश को कैसे समझाऊँ..
उनका छूटा बचपन कहाँ से लाऊँ..
सिखाया गया उन सभी स्त्रियों को
सीता जैसा बनना...
उनकी पीड़ा देखकर
कैसे चुप रह जाऊँ?..
क्यों चलू मैं उस राम के साथ
एक पल भी..
जो लेता रहा मेरे चरित्र की परीक्षा..
हर मोड़ पर .. सब कुछ जानकर ..
माना मैंने सिर्फ उनसे प्रेम किया..
पूरा जीवन उनके लिए समर्पित किया..
लेकिन .. अपनी पीड़ा उन्हें क्यों सुनाऊँ..
बेकसूर होते हुए..
दोषी की तरह क्यों झुक जाऊँ?..
वो तो राजा राम हैं..
सिया के राम नहीं..
जी लेगी सिया राम के बिना..
उसका चरित्र..
उसका व्यक्तित्व..
सिर्फ उसका हैं..
किसी और के नाम नहीं..
©®स्नेहा..
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