कुछ भी नही
बिन तुम्हारे कुछ भी नहीं
जिंदगी हमारी कुछ भी नहीं
क्या हुवा है कुछ भी नहीं
क्या टूटा है कुछ भी नहीं
क्या रुकेगा कुछ भी नहीं
जिंदगी हमारी कुछ भी नही
क्या बनेगी ये कुछ भी नहीं
क्या सजेगी ये कुछ भी नहीं
क्या वफाई थी कुछ भी नहीं
जिंदगी हमारी कुछ भी नहीं
क्यों सिलवटें जिंदगी की
बनी रुकावटें जिंदगी की
क्या आफरीने भी नहीं
जिंदगी हमारी कुछ भी नहीं
क्यों साध ले साधना की
क्यों बाँध ले आराधना की
शिकायत तो कुछ भी नहीं
जिंदगी हमारी कुछ भी नहीं ...
ये लकीरों की भी क्या ज़्यादती
तकदीरों की भी क्या ताजगी
हमको चाहत तो कुछ भी नहीं
बिन तुम्हारे तो कुछ भी नहीं
कुछ भी नहीं
कुछ भी नहीं
- वृषाली सानप काले
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