जर्रा
वो मुझे क्यो तोड़ता है हमेशा
तोड़के फिर मुस्कुराए हमेशा
वक्त को बहलाता है हर बार
हम जो पूछे क्यो आजमाए हमेशा..!
नोक झौक से आँखे भरे जो गर
जख्मो पे मरहम भी लगाए हमेशा..!!
कोई रिश्ता उससे नही है मेरा
पर फरिश्ते सा लगता है हमेशा...!!
मेरी उम्मीद सपने संभाले सदा
क्यो व्यवहार अव्यक्त हमेशा...!!
तुझे खोने के डर से रोये आँखे
क्यो तेरा सहारा चाहु हमेशा..!!
क्या चाहते हो बता दो जरा
क्यो पहेली बनते हो हमेशा..!!
वो अद्वैत रिश्ता मेरा तुम्हारा
तेरे प्रेम का भरा ये जर्रा हमेशा..!!
- वृषाली सानप काले
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