ए ज़िंदगी बता
ऐ जिंदगी बता तू बदल गयी कैसे
ऐ जिंदगी बता तू सवर गयी कैसे...??
जमी भी न थी तूने आसमा बनाया
इम्तहानों की डगर तर गयी कैसे...??
कफ़न दफन दुश्मनी की बस्ती में जीना था
बागबानी सा गुलशन नजर कर गयी कैसे..??
गुनहगारों के आंचल में बेदाग हँसना था
नापाक जहाँ में पाक मुक्कदर कर गयी कैसे...??
तेरे मुक्कदर का बता वो कौन मसिहा
जो तेरे तस्सवुर का जहर हर गयी कैसे...??
🌹🌹🌹
- वृषाली सानप काले
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