बंजारा मन
शिकायत है कि ध्यान भटकता है हमारा,
कोई बताए उनको कि भटकन ही जीवन
💎
जीवन का सार निचोड़ कर देखा तो पाया,
कभी यहाँ तो कभी वहाँ भटकते फिरे हम
💎
कभी दिल ने कहा, कभी दिमाग ने कहा,
चल यहाँ मेरे संग, यही तो तेरी मंज़िल है
💎
हकीक़त के आईने ने कहा मैं तो तेरे पास,
मुझे ढूंढने क्यों भटके इधर उधर लौट आ
💎
तेरा हेतु तो सिर्फ़ मुझे है पाना जाना कहाँ,
मैं तेरे अंदर हूँ चीर काल से जरा झांख खुद में
💎
- अनामिका
Comments
Post a Comment