एक कविता मेरी

हिंदी की सेवा में
एक कविता मेरी

राष्ट्र की पूजा में
एक अर्चना मेरी।

भाषा की प्रार्थना में
एक आराधना मेरी।

भारत की पहचान में
एक साधना मेरी।

हिंदी की महत्ता में
एक जिज्ञासा मेरी।

राष्ट्रीयता की धरोहर में
एक याचिका मेरी।

भाषिकता के विवादों में
एक मुलाईजा मेरी।

प्रांतीयता की घोषणा में
एक संवेदना मेरी।

हिन्दुस्थान की मिट्ट में
एक मुरलिया मेरी।
🌹
- वृषाली सानप काळे

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