हिंदी कविता
साजन
क्यों तरसाये जिंदगी हमे
क्या बतलाये साथिया तुम्हे...
क्यों भर आये अश्क़ ये सुने
क्यों हुवे तेज ये धड़कने..
ये खाती मर्यादा हमेशा हमे
उलझन में ही डुबाये हमे..
जैसे भँवर में फँसी कश्ती
उजाड़े ही भावना की बस्ती..
साँसे संग हर आह तुम्हारी
दिखाऊ है कर्जदार तुम्हारी...
चाहत इबादत इनायत भी
संस्कारो की है इजाज़त भी...
खुदा के साथ तुम्हारी भी
ऋणी है सारी जिंदगी भी..
जग को हो अमान्य फिर भी
तू मेरी इज्ज़त है मोहोब्बत भी...!!
हक वफ़ा की चाहत तेरी
पूजे हर आदत हम तेरी..
रिश्ते कर्मो से बंधे हमारे
हम बंधे जज्बातों से तुम्हारे...!!
बड़े कच्चे जग के सारे धागे
हम न तेरी मोहोब्बत से भागे..!!
निभाना अपनी वफ़ा के वादे
पाकिज है साजन मेरे इरादे...!!
🙏
वृषाली सानप काळे
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