खुद की खुद के लिए रूहानी सेवा
मैं अत्यंत पवित्र आत्मा हु। मैं शक्ति स्वरूप आत्मा हु। मैं आत्मा इस देह की मालिक हु।
मैं, इस देह की मालिक आत्मा इस देह में स्थित समस्त भटकती हुई सूक्ष्म अति सूक्ष्म आत्माओ को आदेश देती हूं, इस देह से बाहर निकलो। इस देह में रहकर कोई भी फायदा नहीं। ऐसे भटकते रहने से बेहतर मुक्ति पाओ। तुमको मुक्ति केवल परमपिता परमात्मा देगा। अन्य कोई भी न राा,म न कृष्ण, न सीताा, न राधा, न हनुमान, न जगदम्बा कोई भी तुमको मुक्ति नहीं दे सकता।
परमात्मा से डरो नहीं। वो किसीको सजा नहीं देता वो तो प्रेम का सागर है। वो प्यार देता है, दुख हर्ता व सुख करता है। मनुष्य के कर्म उसको दुख देते है।
समस्त भटकती आत्माओ निकलो, आंखों से, माथे से, चेहरे से, गले से, गालों से, भृकुटि से, हर जगह से निकलो जाओ आसमान के पास जाओ। आगे बढ़ो। सीधे आगे चलो। परमात्मा से माफी मांगो वो जन्म जन्मानन्तर की तमाम गलतियों के लिए तुम्हें माफ कर देगा।
जाओ आत्माओ मुक्ति हासिल करो। खुदा मुक्ति बांट रहा है। संगम युग में ही मुक्ति मिलती है।अन्य किसी भी जन्म में मुक्ति नही मिलती। खुद ही खुद पर कृपा करो। उठो आत्माओ उठो, मुक्ति की डगर पर आगे बढ़ो।
ओम शांति
- वृषाली सानप काले
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