बरखा : मौसम - ऐ - शरारत
बरखा : मौसम-ऐ-शरारत
- Kaushalya

- करवट बदली मौसम ने,
- और अंगडाई ली हवाओं ने
- लहरायी चुनरियाँ बदलो ने,
- आसमान में फैलाया आँचल
- धरती ने सज़ा रूप नया
- चारों तरफ फैली हरियाली
- देखो वो....
- उमड़-घूमड़ बादल दौड़े आ रहे
- बिजली ने भी मृदंग नाद छेड़ दिया
- पवन ने भी तूफान का रूप धारण कर लिया
- मोहे लागे प्यारे ये सब नज़ारे
- शरारत तो देखिए मौसम की,
- झूमता हुआ सावन आया
- याद ले आई आपकी
- मन चाहे कि....
- ये उमड़-घूमड़ बदलियाँ
- ले आए आपको हमारे पास
- और मेघ बन बरसे आप का स्नेह
- बारिस की बूँदो ने, छेड़ दिए मान के तार
- जी चाहे....ये शमा यही ठहर जाए
- मंद-मंद पवन मे लहराई है झुल्फ,
- कुन्तल पर बूँद सजी कुंदन की।
- मयूर की तरह थिरकट लेता हुआ
- आया सावन चित्त चुराने
- प्रफुल्लित हो उठा मेरा मन
- आयी ऋतु रंग सजाने की,
- प्रकृति से मन तक पहुँचने की।
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