रिश्ता नहीं
कोई गिला नहीं, कोई शिकायत नहीं,
कैसे कह दे तुम हक़ीक़त नहीं।
कैसे कह दे तुम हक़ीक़त नहीं।
क्यों रोके तुम्हें, क्यों टोकें तुम्हें,
जब तुमसे हमें मोहब्बत ही नहीं।
क्यों कहे तुमसे की आना-जाना कभी,
जब तुमसे हमारा कोई रिश्ता नहीं।
क्यों गोते लगाए वो उम्मीद के दरिया में,
जिसका कहीं कोई साहिल ही नहीं।
ठहर जाओ थोड़ा सा तुम्हें क्यों कहे,
जब तुम्हारे लिए हम कुछ भी नहीं।
- 'अनामिका'
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