कलाम जी
आँख मेरी नम हुई
जब तुम्हे ही खो गई...
तू ही था आँखों का तारा
तू था जग से ही न्यारा..।।
तू ज्ञानी बड़ा ज्ञान से
तू मानी बड़ा मान से...
तू था सागर ऋदय
तू ही था प्रेम संगम...।।
तू ही हमारा गुरुर
तू ही देश का सुरूर..
आँख नमी है जरूर
दिल तड़पे मजबूर...!!
देश तूने ही सवारा
हर हल को किनारा..
देश ऋणी है तुम्हारा..
कैसे भूले उपकारा..।।
कलाम का ये कलमा
सजे भारत का अंगना..
तिरंगे के ही रंगमा
हरे धर्म-जाती खात्मा..।।
- वृषाली सानप काले
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